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Wednesday, May 13, 2020

अब घराें का आर्किटेक्चर बदलेगा; अधिक स्टाेरेज और स्मार्ट टेक्नाेलाॅजी की मांग बढ़ेगी, डाइनिंग रूम होगा दफ्तर, लाेग ज्यादा वेंटिलेशन चाहेंगे

काेराेनावायरस के बाद लाेगाें का रहन-सहन बदलने जा रहा है। आर्किटेक्ट्स और डिजाइनर्स का मानना है कि नए बनने वाले घराें की डिजाइन में आमूलचूल परिवर्तन आएगा। जिन बाताें काे घर या अपार्टमेंट बनाते समय कम जगह का हवाला देकर नजरअंदाज कर दिया जाता था, उनकी मांग बढ़ेगी। घर में लोग ऑफिस स्पेस, क्लासरूम, आर्ट स्टूडियाे, जिम के साथ स्टाेरेज बढ़वाएंगे। हालांकि, शहरी इलाकाें में यह चुनाैती साबित हाेगा।
‘वर्क फ्राॅम हाेम’ दफ्तर खुलने के बाद भी जारी रहेगा
आर्किटेक्ट मैटलैंड जाेन्स कहते हैं, ‘काॅलेज कैंपस की तरह घर में खाने, पढ़ने, साेने की सीमाएं टूट सकती हैं। किसी अपार्टमेंट का एक कमरा कई काम आ सकता है। डाइनिंग रूम, दफ्तर या कुछ और रूप भी ले सकता है।’कमराें का आकार बदल सकता है। घर में छाेटी ऐसी जगह निकाली जा सकती है, जहां प्राइवेट काॅल या वीडियाे काॅन्फ्रेंसिंग कर सकें।

'प्रकृति से जुड़ाव लाेगाें की प्राथमिकता बन जाएगी'
ऑर्किटेक्स माॅरिस एड्ज्मी कहते हैं, ‘अब ताजी हवा और प्रकृति से जुड़ाव लाेगाें की प्राथमिकता बन जाएगी। इसे अधिक बालकनी या टेरेस बनाकर पूरा किया जा सकता है।’ आर्किटेक्ट पाॅल व्हालेन बताते हैं, ‘शहराें में लिविंग रूम में फ्रेंच डाेर या जुलिएट बालकनी बनाकर ऐसा किया जा सकता है।’

बड़ी खिड़की या क्राॅस वेंटिलेशन के लिए बड़ी डिजाइन का चलन लाैट सकता है। शहरी इलाकों के घराें या फ्लैट में स्टाेर जरूरी हाे जाएंगे। बड़ी अलमारी या पैंट्रीज बनने लगेंगी।चूंकि सतह काे छूने से काेराेना वायरस चिपक सकता है। इसलिए स्मार्ट हाेम टेक्नाेलाॅजी की मांग बढ़ेगी। घर आते ही दरवाजा अपने आप खुलेगा या बत्तियां जल जाएंगी।

ये तकनीकें उपलब्ध हैं, लेकिन अब तक इन्हें अतिरिक्त माना जाता था। लिफ्ट में बटन प्रेस करने के बजाय बाेलना भी पर्याप्त हाे सकता है। घर में प्रवेश करते ही हाॅल से पहले कमरेजैसी जगह बनने लगेगी, जहां लाेग जूते-चप्पल उतार सकें या सामान रख सकें। अब तक ऐसी जगह नजरअंदाज कर दी जाती थी।

टीबी-इन्फ्लूएंजा के बाद 20वीं शताब्दी में आया था बदलाव
आर्किटेक्ट पाॅल व्हालेन कहते हैं, ‘एक शताब्दी पहले टीबी और साल 1918 में इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी आई थी। इसका आर्किटेक्चर पर बड़ा असर हुआथा और स्वास्थ्य-भवन बनाए जाने लगे थे। ये खुले-खुले हाेते थे। खूब सारे प्रकाश और हवा की व्यवस्था रहती थी। इस तरह के आर्किटेक्चर का 20वीं शताब्दी के घराें में खासा प्रभाव रहा।’ खुले-खुले घर बनाने का चलन फिर लौट सकता है।



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ऑर्किटेक्स माॅरिस एड्ज्मी कहते हैं कि अब ताजी हवा और प्रकृति से जुड़ाव लाेगाें की प्राथमिकता बन जाएगी।


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